अपनी मर्जी से रुखसत किया है मुझे,
आंख तेरी क्यों फिर आज भर आई है,
कभी ख्वाबों में भी जो न आने दिया,
वो उदासी क्यों फिर से नज़र आई है,,.. कभी ..
तेरी खुशियों की खातिर ही जिंदा हूं मैं,
मुझ को इस जमाने की परवाह नहीं,
तू समझे ना समझे, तेरा अपना हूं मैं,
मुझ को किसी बेगाने की परवाह नहीं.
हर पल साथ देने की कोशिश किया,
तू है मुश्किल में, जब भी खबर आई है.....कभी...
आजा फिर से तेरे सारे गम हर लू मैं,
तुझे जमाने की नज़रों में आने न दूँ ,
मेरी पलकों की छांव में सलामत रहे,
अब खुदा को भी तुम को सताने न दूं,.
सबका जीवन समंदर है ये जान ले तू,
बस इतना समझ फिर लहर आई है ...कभी...
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