तकदीर के पन्नों पर स्याही का इंतज़ार नहीं होता,
कसौटी पर खड़ा शख्स कभी लाचार नहीं होता।
मेरी ज़िद थी कि मैं उलझूँ वक़्त की हर आफ़त से,
क्योंकि तूफानों से लड़े बिना, समंदर पार नहीं होता।"
-कालू राम सैनी
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