जिसके अमल ने दश्त को दरिया बना दिया
उसको ज़माने वालों ने झूठा बना दिया।
मंज़िल की जुस्तजू में बढ़े इतने हौसले
हमने पहाड़ काटके रस्ता बना दिया।
मैं कुछ नहीं था आपकी नज़रों का फैज़ है
पत्थर में जान डाल दी हीरा बना दिया।
पहले तो मेरे ख़्वाबों को दी ताज़ा ज़िन्दगी
फिर ज़िन्दगी को तुमने तमाशा बना दिया।
कश्मीर जो ज़मीन पे जन्नत निशान था
दहशत का आपने उसे अड्डा बना दिया।
दामन पे जिसके खून के धब्बे हैं आज भी
हालात ने उसी को मसीहा बना दिया।
शोहरत मिली तो लोगों के लहजे बदल गये
दौलत ने कितने लोगों का शजरा बना दिया।
मेयार शायरी का यही रह गया
कशिश लोगों ने शेर गोई को पेशा बना दिया।
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