कुछ ऐसा हुनरमंद हूँ मैं यारों,
चट्टानों पर भी छाप छोड़ जाता हूँ।
दोस्ती हो या फिर दुश्मनी,
हर रिश्ता शिद्दत से निभाता हूँ।
–कुँवर सर्वेन्द्र विक्रम सिंह
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