हंसने में बेवकूफ समझे जाने का डर है,
रोने में डब्बू समझे जाने का डर है,
लोगों से मिलने में नाते जुड़ जाने का डर है,
अपनी भावनाएं प्रकट करने में,
मन की सच्ची बात खुल जाने का डर है,
किसी को कुछ देकर बदले में न पाने का डर है,
जीने में मरने का डर है,
आशा में निराशा का डर है,
कोशिश करने में असफलता का डर है,
शिक्षक के सामने होशियारी दिखाने का डर है,
मजाक करने से पागल समझे जाने का डर है,
लास्ट बेंच में बैठने से आगे आने का डर है,
रैंक में आने से पीछे जाने का डर है,
किसी के कुछ सवाल करने पर जवाब देने का डर है,
ट्रेन में टी.टी के सामने पकड़े जाने का डर है,
हाइवे में चलने का डर है,
दुकान में जाने से वस्तु का दाम कम करने का डर है
परीक्षा के बाद अपना पेपर का नंबर सुनने का डर है,
गाना गाने से बेसुरा हो जाने का डर है,
डांस करने से स्टेप भूल जाने का डर है,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X