तुम को जाना था
तुम रूके नहीं
वक्त को भी जाना था
चला गया
तुम्हारी तरह
तुम ठहर भी जाते
कुछ नहीं बदलता
ना खुद को दोहराता वक्त
ना ही ठहरता
तुम्हारी तरह ।
-मं शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X