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यादों की चुभन

                
                                                         
                            वो लम्हे जो कभी दिल को अता सुकूँ करते थे,
                                                                 
                            
वही अब रूह में मेरी ख़लिश भरा करते हैं।
मचलती थी जहाँ खुशबू महकते ख़्वाब की हरदम,
वही यादें अब आँखों में धुआँ भरा करती हैं।

जिन्हें हम ज़िन्दगी कहते थे, वो अब सिर्फ़ किस्से हैं,
जो मरहम थे कभी, वो आज ज़ख़्मों के ही हिस्से हैं।

वो हँसना साथ में मिलकर, वो बेमतलब की सब बातें,
अंधेरों में डराती हैं अब अक्सर वो मुलाक़ातें।

वो यादें जो कभी चन्दन सी शीतलता लुटाती थीं,
वही अब आग बनकर रूह में मेरी सुलगती हैं।
जिन्हें पलकों पे सँवारा था बड़े ही लाड़ से हमने,
वही तसवीर अब आँखों में नश्तर सी खटकती है।

कभी जो नाम लेने से लबों पर फूल खिलते थे,
उसी नाम की आहट से अब साँसें भी ठिठकती हैं।
अजीब इक मोड़ पर लाया है यादों का ये दरिया,
किनारा सामने है और कश्ती गोतो में डुबकती है l
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एक दिन पहले

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