लो सूरज आज फिर रुख़्सत ले चला हाथ में उम्मीद नए बेहतर से दिन की थमाये चला
कहता है रोज़ यूँ ख़ुद को मनाते रहें
मंज़िलें कल की ताकें और भले हाथ से आज निकलता चला
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