शत्-शत् नमन तुझे मेरी माँ
सृजन का शुभारंभ है मांँ
पालिका रक्षा कवच है माँ
दुखों की चादर समेटे मांँ
सुखों का बिछौना बिछाए माँ
मांँ सोए तो जग सो जाए
मांँ जागे तो जग जगमगाए
मांँ के भीतर दुनिया सारी
मांँ है प्रतिपल प्यारी-न्यारी
मांँ-बच्चे का अद्भुत नाता
नाल से नवजीवन जुड़ जाता
रिश्ता यही है सबसे सच्चा
बूढ़ा भी है माँ का बच्चा
विश्व की केन्द्र-बिंदु है मांँ
अखिल सृष्टि कण-कण में मांँ
हर शिशु की निश्छल छाया
अक्षर,अक्षर, मात्राऍं माँ
तू ही क्षमा, तू ही उष्मा
तुझमें सारी भाव-भंगिमा
माँ की गोद तरसे ब्रह्मा
सर्वस्वरात्मिका मात्रा-माँ
नमन तुझे मेरी माँ
शत्-शत् नमन तुझे मेरी मांँ
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