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दोस्ती निभाइए..

                
                                                         
                            दोस्ती कोई रिश्ता नहीं, एक रूहानी एहसास है,
                                                                 
                            
जो हर धड़कन में बसा हुआ एक ख़ामोश सा राज़ है।

ये ख़ून का बंधन नहीं, फिर भी सबसे क़रीब होता है,
हर दर्द में, हर ख़ुशी में दिल का हबीब होता है।

फ़ासले चाहे कितने भी बढ़ जाएँ राहों के दरमियाँ,
दोस्त अगर सच्चा हो तो दिल रहता है उसके आशियाँ।

कुछ रिश्ते लफ़्ज़ों से नहीं, ख़ामोशियों से पलते हैं,
बिन कहे जो दिल की हर बात समझ लें, वही तो अपने होते हैं।

दोस्ती में शिकवे भी हैं, नाराज़गियाँ भी आती हैं,
मगर हर रूठी हुई शाम के बाद मुस्कुराती सुबहें आती हैं।

झगड़े मोहब्बत को कम नहीं, और गहरा कर जाते हैं,
दो दिलों के बीच भरोसे के नए दीप जला जाते हैं।

दोस्त के आँसू अपनी पलकों पर उतर आते हैं,
उसके ग़म जाने क्यों अपने दिल को भी रुला जाते हैं।

नसीब वालों को ही मिलती है ऐसी पाक दोस्ती,
जिसमें हर दुआ में शामिल हो एक-दूजे की ज़िंदगी।

दोस्ती कोई वादा नहीं, जो वक़्त के साथ बदल जाए,
ये तो वो दुआ है जो हर साँस के साथ निकल जाए।

अगर ज़िंदगी एक लंबा सफ़र है,
तो दोस्त उसकी सबसे ख़ूबसूरत मंज़िल हैं।

और अगर दिल एक किताब है,
तो दोस्त उसकी सबसे हसीन ग़ज़ल हैं।

दोस्ती निभाइए...
क्योंकि दुनिया की हर दौलत एक दिन खो सकती है,
मगर एक सच्चा दोस्त—
दिल में बस जाए,
तो उम्र भर साथ चलता है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
56 मिनट पहले

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