खिलखिलाता चेहरा लेकर मुस्कान दिखा रही थी,
असल में वो हमसे अपने ग़म छिपा रही थी।
दिल बेचैन, मन परेशान था,
तभी नज़रें हटाकर कहीं और झुका रही थी।
दर्द बेहद था उनकी नज़रों में,
भड़कता शोला उनके जिगर में था।
भुलाकर दर्द मुस्कुराने की वजह सिखा रही थी,
असल में वो हमसे अपने दर्द छिपा रही थी।
लबों पर हँसी थी, मगर आँखें कहानी कह रही थीं,
हर खामोशी अपने भीतर एक सदी सह रही थी।
जो सबको हौसला देकर आगे बढ़ा रही थी,
असल में वो खुद ही अंदर से टूटती जा रही थी।
अपनों की खुशी में अपनी खुशियाँ भुला रही थी,
असल में वो हमसे अपने दर्द छिपा रही थी।
हर दर्द को दिल में चुपचाप सजा रही थी।
चेहरे पर उजाला था, मगर दिल में रात थी,
हर मुस्कान के पीछे छिपी एक अनकही बात थी।
दुआ यही है, कोई ऐसा अपना मिल जाए,
जिससे वो भी अपने सारे ग़म बाँट पाए।
किसी ने पढ़ी ही नहीं वो ख़ामोश दास्ताँ,
जो हर पल निगाहों से सुनाए जा रही थी।
असल में वो हमसे अपने दर्द छिपा रही थी।
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