तुम न मिले होते मिल गया होता कोई और हमें
आशना दर्दे-दिल से होना ही था किसी तौर हमें!
आरज़ू बड़ी थी सुकून-ए-क़ल्ब की वस्ले-यार में
वस्लो-विसाल में दिखा न प्यार किसी ओर हमें!
-एन. आर. कस्वाँ
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