आस कभी पूरी होगी
भटक रही अंधकार में
तलाश करती हुईं जिंदगी
आस कभी पूरी होगी
या अधूरी ही रह जाएगी l
बढ़ती चली जा रही पग
ठहरने का नाम नहीं ले रही
एक उम्मीद बाकी है
किसी के थामने का
एक एहसास बाकी है
आस कभी पूरी होगी
या अधूरी ही रह जाएगी l
उस खुशबू को तलाश कर रही
उसी ओर जा रही है
क्या मिल पाए
उसकी खुशबू
हाथ बढ़ने को है तैयार
क्या छू लेगी उसे
आस पूरी होगी या
अधूरी ही रह जाएगी l
आकाश में
परिंदों के संग
उड़ना चाहती है
पंख कट गए हैं
कैसे उड़ पाए
उम्मीदों का दामन न छोड़ा l
आस पूरी होगी या
अधूरी ही रह जाएगी l
-नीलम झा
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