ख़्वाब।
दिन ढल गया।
आसमाँ पर चाँद
मुस्कुराने लगा है।
चाँदनी की नर्म चादर में
बिरह-वेदना से व्याकुल मन,
जुगनुओं की गुनगुनाहट संग
सिसकियाँ छिपाने लगा है।
राख में दबी चिंगारी-सा
एक अरमान आज भी,
मेरी आँखों में ख़्वाब बन
चुपके से जगमगाने लगा है।
चुपके से जगमगाने लगा है।
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