आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सजाएं दिए जाते हैं

                
                                                         
                            वो दूर से ही दिल को मेरे, सजाएं दिए जाते हैं..
                                                                 
                            
भड़के हुए शोलों को, और हवाएं दिए जाते हैं..।

कहने को तो वो, देख कर मुस्कुराते हैं अब भी..
मगर लगता है, दर्द-गम-की सदाएँ दिए जाते हैं..।

हमने खोल कर रख दिए हैं, राज़ दिल के अपने..
वो मर्ज़ जान के भी, और ही दवाएं दिए जाते हैं..।

हमको तो अब दर्द छुपाने का, नया हुनर आ गया..
वो हमे गम दिए जाते हैं, हम दुवाएं दिए जाते हैं..।

हम उनकी गलियों से, कुछ उम्मीद से गुजरते रहे..
वो हैं कि कशमकश-ए-बीम-ओ-रजायें दिए जाते हैं..।
-पवन कुमार "क्षितिज"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर