आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अस्सल सोनो की हसली वाला दिन

                
                                                         
                            कहां गया वय दाई माई का
                                                                 
                            
सोनो की हसली का, निर्भयता का दिन।
कहां गया वय गांव की खेती पर
पूरों गांव की जनता को निर्भरता का दिन।।

कहां गया वय गांव मा
कपला गाय अना सांड पालन का दिन।
कहां गया वय खुशहाली साती
गोधुलि बेला पर दिंडी कहाड़न का दिन।।

कहां गया वय सकारीच
गाय सोड़ो गो भाऊं, स्वर गूंजन का दिन।
कहां गया वय बेस्कड़ पर
गोधुलि बेला पर लुभान जारन का दिन।।

कहां गया वय
घर गाय को बछड़ा ला नंदी सोड़न का दिन।
कहां गया वय नंदी धरके
महादेव की यात्रा मा पोहा लिजान का दिन।।

कहां गया वय चिमनी का
छपरी, कोठा मा गोधा बनावन का दिन।
कहां गया वय कारी रात मा
जुगनू को जुग जुग उजाड़ों देखन का दिन।।

कहां गया वय गली लक
गांव कामथ मा खगार-पानी जान का दिन।
कहां गया वय बरसात मा
खेत की खांड पर झिनका मंडावन का दिन।।

कहां गया वय समाज मा
बहु बेटियों का अखाड़ी अना चौमास का दिन।
कहां गया वय बिहया बरात मा
बहु बेटि का सजन- धजन- लाजन का दिन।।

-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर