कहां गया वय दाई माई का
सोनो की हसली का, निर्भयता का दिन।
कहां गया वय गांव की खेती पर
पूरों गांव की जनता को निर्भरता का दिन।।
कहां गया वय गांव मा
कपला गाय अना सांड पालन का दिन।
कहां गया वय खुशहाली साती
गोधुलि बेला पर दिंडी कहाड़न का दिन।।
कहां गया वय सकारीच
गाय सोड़ो गो भाऊं, स्वर गूंजन का दिन।
कहां गया वय बेस्कड़ पर
गोधुलि बेला पर लुभान जारन का दिन।।
कहां गया वय
घर गाय को बछड़ा ला नंदी सोड़न का दिन।
कहां गया वय नंदी धरके
महादेव की यात्रा मा पोहा लिजान का दिन।।
कहां गया वय चिमनी का
छपरी, कोठा मा गोधा बनावन का दिन।
कहां गया वय कारी रात मा
जुगनू को जुग जुग उजाड़ों देखन का दिन।।
कहां गया वय गली लक
गांव कामथ मा खगार-पानी जान का दिन।
कहां गया वय बरसात मा
खेत की खांड पर झिनका मंडावन का दिन।।
कहां गया वय समाज मा
बहु बेटियों का अखाड़ी अना चौमास का दिन।
कहां गया वय बिहया बरात मा
बहु बेटि का सजन- धजन- लाजन का दिन।।
-ओ सी पटले
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