मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट,
किस्मत का हूँ मारा,
हर जगह दुतकरा जाता,
हर कोई बाय-पास करने की करता कोशिश,
हर कोई नई तरकीब लगाता,
छुटकारा पाने की कोशिश है करता,
मैं हूं फटा हुआ नोट,मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट.
कितना बेइज्जत किया मैं जाता,
मुझे देख,लोगो का मुँह सिकुड़ है जाता,
जैसे किसी बे-स्वाद चीज़ से,
लोगो का जायका ख़राब हो जाता,
कोई चालाकी से मुझे चलाता,
पकड़े जाने पर लड़ाई-झगड़ा हो जाता,
मैं हूं फटा हुआ नोट,मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट.
जैसे सौतन जलती हैं,मुझे नए नोट से जलन होती,
पर्स में भी किसी के मुझे कभी जगह नहीं मिलती,
आखिर में मेरी गति भी,बहुत बुरी है होती,
बट्टे पर जो नोट लेते हैं,
वो शीशे के नीचे मुझे सजाता,
और फिर मेरा आखिरी दौर है आता,
मैं हूं फटा हुआ नोट,मैं हूं कटा-फटा हुआ एक नोट.
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