आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अफसाना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            सुना कर बात दिल की हम गुजारिश तुमसे किया करते थे बहुत तल्ख है फसाने जिंदगी के तुमसे कहा करते थे
                                                                 
                            
तेरी गली में लोग भी थे दुश्मन मेरे पी के हम अरमां के आंसू सामने तेरे अक्सर दर्द अपना सुनाने आया करते थे
दर्द के फूल बिखर जाते थे जख्म जैसा भी हो मेरा भर जाते थे और फेर कर नजर तुम भी गुजर जाया करते थे
जब चाहा तुमने भुला के बढ़ा दिया फासला जिस तरह तुम आज बिछड़ रहे इस तरह पहले भी किया करते थे
देख कर बेरुखी तेरी घुट घुट आंसू पीना पड़ा हमें ऐ जिंदगी जो जख्म तूने हमें दिया वो पहले भी दिया करते थे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर