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फसाना ए बेचैन ख्वाहिशें

                
                                                         
                            उसूलों पर दुनिया चलती कहां ये हर कोई जानता है और मिले ना तुम कभी हमसे जिंदादिली से ये हम जानते हैं
                                                                 
                            
बढ़ा के दर्द चुप होना है रिवाज़ आपका देकर वादे हजार भुला देना है जो भी अंदाज आपका सच हम जानते हैं
ना करो हमें परेशान खिलाफ तेरा कर ना पाऊंगा बदल कर दर्द बढ़ा देना मिजाज़ आपका ये सच हम जानते हैं
बहला के दिल पिछली यादों से इरादा आपका समझ ना कभी पाए इक तू भी तो है खफा क्यूं सच हम जानते हैं
वक्त ए रुखसत मिला ना तू भी तो जिंदादिली से बढ़ा के बेरुखी भुला हमें देने वाले अंदाज़ आपका हम जानते हैं
होकर बर्बाद जिंदा रहने का सलीका सीख लिया मैंने चल कर साथ तेरे घुट घुट के जीना पड़ा सच हम जानते हैं
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29 मिनट पहले

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