अभी अभी बिछड़ा हैं तू ही शायद किसी रोज़ हमें भूल जाएगा यादों के मंजर में गुमनाम कर जाएगा
घर से जब भी निकलूं चिराग उम्मीदों का साथ लेकर चलूं क्या पता नसीब ही बदनाम कर जायेगा
इतने दिन हुए तुमसे बिछड़े हुए गर मिलने की सूरत कोई नज़र आई तो तू ही हमें इंकार कर जाएगा
तुम पुकारोगे मैं ठहर जाऊंगा वरना गुजर के मुसाफिर की तरह इशारा मेरा कभी अंजाम कर जाएगा
शाम ए गम यादें तेरी सहेज कर और क्या मैं करूं मोहब्बत का शुरूर कभी मुझे बदनाम कर जायेगा
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