हवा में कुछ नमी-सी थी, फ़िज़ाओं में अधूरापन,
मगर दिल फिर भी खिल उठता, तुम्हारा हाथ थामे
भरोसा उठ गया था अपने ही मुकद्दर से
किस्मत आज़माना है, तुम्हारा हाथ थामे
हर इक मोड़ पर दुश्मन खड़े थे मुहब्बत के,
मगर अब डर नहीं लगता, तुम्हारा हाथ थामे
रहेंगे साथ हम ऐसे कि अफ़साना कहे दुनिया,
फ़लक तक साथ चलना है, तुम्हारा हाथ थामे
चमकती सी दुनिया में हसरत भी नहीं दौलत की,
क़ीमत तो बस लम्हों की है, तुम्हारा हाथ थामे
बेकरारी में भी अब एक सुरीला सुकून मिलता है,
ज़िंदगी खुद एक तराना है, तुम्हारा हाथ थामे
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