क्या बोलूं मैं
क्या लिखूं मैं
अपनी बुराइयां?
लोगों की छेड़खानियां?
बस,
सर टूटता रहता है...
क्या
आंसू ढलकाके मिलता है?
प्यास ने
रौंद डाला है!
उपहास ने
मौन किया है...
कल के लिए... नहीं बात टालना है!
चाहे धीमे ही सही, पर नाव चलाना है
-राहुल
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