जो हुआ
उसे भूल जाओ राहुल
वैसे भी, अभी की ही घड़ियों...
तक तेरी पहुंच
अब,
इतना भी सवालिया नहीं
भगवान के सामने होओ!
छोड़
के सारी चिंता विंता...
मस्त बाग उद्यान में घूमो
तू ही ज़्यादा
सोच रहा है!
कुछ नहीं
सच में, कुछ नहीं हुआ है
अकेलेपन का
मुद्दा ही नहीं इस समय
अब जाके तो तू
जुड़ा है ख़ुद से...
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