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खुद की पहचान

                
                                                         
                            मैं क्या हूं तुम्हें पता नहीं,
                                                                 
                            
तुम क्या हो तुम्हें पता होना चाहिए!
कलम कितनी ही महँगी टांग लो कुर्ते में,
लिखने के लिए हुनर होना चाहिए!

फर्जी डिग्रियों से अलमारियां भर लो,
कुछ समझने बोलने के लिए जिगर चाहिए!
नए दौर में लिबास तुम्हारा नया होगा,
आज भी इज्जत के लिए संस्कार पुराना ही चाहिए!

फुर्सत निकालना होगा तुम्हें,
खुद को समझने के लिए जिंदगी हल्की चाहिए!
मैं क्या हूं तुम्हें पता नहीं,
तुम क्या हो तुम्हें पता होना चाहिए!!
 
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एक घंटा पहले

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