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बंद दरवाज़े

                
                                                         
                            क्यों खटखटाने बंद रहते घरों के दरवाज़े,
                                                                 
                            
बेजान रुहें वहाँ अंधेरे कमरों में रहा करती हैं,
औरों की ग़म-ओ-ख़ुशी से उन्हें सरोकार नहीं,
कट रही ज़िंदगी को वो ज़िंदगी कहती हैं.

 
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एक घंटा पहले

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