क्यों खटखटाने बंद रहते घरों के दरवाज़े,
बेजान रुहें वहाँ अंधेरे कमरों में रहा करती हैं,
औरों की ग़म-ओ-ख़ुशी से उन्हें सरोकार नहीं,
कट रही ज़िंदगी को वो ज़िंदगी कहती हैं.
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