कि कोई मुझे मुझ सा मिल जाय तो क्या बात है...
वो इश्के इबादत समझ जाए तो क्या बात है,,
और उसे ढूंढती फ़िरू मैं मन की गहराई में,,,
और वो मेरा हाथ पकड़ किनारे पे ले आए तो क्या बात है
अगर उसे देखने की चाहत मेरी हो
उसे देखने की चाहत अगर मेरी हो,,
और उसकी आंखें मुझसे टकरा जाए तो क्या बात है
दीवानगी की चौखट में तो दीवानों की लगी भीड़ है
दीवानगी की चौखट में तो दीवानों की लगी भीड़ है
वफ़ा के चौखट में अगर खड़ी दिखूं मैं
और मुझे उसके आने की आहट मिल जाय तो फिर क्या बात है...।
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