मन भावों से भर जाए तो
दृगकोरक में आते आंसू
अंतःकरण का मैल पौंछकर
मन निर्मल कर जाते आंसू
दिल पर बोझ हुआ भारी तो
पीड़ा को कह जाते आंसू
बहुत खुशी हो या कोई गम
दोनों को सह जाते आंसू
एहसास जो जिंदा है सीने में
इसका साक्ष्य दिलाते आंसू
सजल नयन देखे जो उनके
हमको भी तो रुलाते आंसू
छिटक जाए अपना कोई जब
उसको पास बुलाते आंसू
अपनेपन की धमकियों से
अपनों को दहलाते आंसू
खामोश जुबां हो फिरभी देखो
सब कुछ तो कह जाते हैं
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