नाराजगी है उनसे, मगर नाराज भी नहीं
कहना तो बहुत है, पर अल्फाज भी नहीं
अजब सी कशमकश में हूं...
शिकायत है उनसे, मगर कोई गिला भी नहीं
रोज मिलता हूं उनसे, पर कभी मिला भी नहीं
अजब सी कशमकश में हूं...
बतियाना है उनसे, मगर कोई बात भी नहीं
काम कुछ नहीं यूं तो, मगर काम से निजात भी नहीं
अजब सी कशमकश में हूं...
लाचार हूं हालात से मगर मजबूर भी नहीं
पास नहीं है वो मेरे, मगर दूर भी नहीं
अजब सी कशमकश में हूं...
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X