सात की आग, सात के साथ,
सात ने बिछाई जीवन की बिसात।
हर चाल में छिपा एक नया विश्वास,
सात से ही सजता सृष्टि का प्रकाश।
ये रंग भी सात, ये चक्र भी सात,
जीवन के सुरों की मधुर सौगात।
इंद्रधनुष से चेतना तक का विस्तार,
सात में समाया सृष्टि का संसार।
सात ग्रह दें कर्मों को दिशा,
सात समंदर गाएँ साहस की भाषा।
हर लहर सुनाए अनगिनत दास्तान,
सात में बसता अनंत का सम्मान।
सप्तऋषि जिनको करते नमन,
ज्ञान, तप और सत्य का अमर वंदन।
सात महाद्वीप, एक धरा का मान,
विविधता में गूँजता मानव का गान।
सात सुरों से महके संगीत,
सात फेरों से जुड़ता प्रीत।
सात वचन, सात जन्मों का साथ,
सात ही दिखाए जीवन की राह।
अंक नहीं, यह सृष्टि का सार,
हर युग में जिसका अनुपम विस्तार।
जहाँ भी देखो, गूँजे एक ही बात—
सृष्टि की हर धड़कन में बसता है “सात”।
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