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नयी राग

                
                                                         
                            केशों की सभा से,
                                                                 
                            
तेरे नैन भरेंगे तान,
पलकें बांधेगी समा
वाद्ययंत्र बनेंगे प्राण,

ह्रदय ताल सजायेगा
प्रेम राग नयी सजाए ,
अधरों से आएगी सरगम
सुर लगाएगी अदाएं ,

पंक्ति रचेगी नियती आज,
प्रकृति गाएगी अलाप,
विशेष नवीन नूतन आज,
गीत बनाएगी अमाप,

वाद्ययंत्र लिए अनुरागी
जतन करते जाएगा ,
श्रोता दर्शक आप ही
बन आंनद उठाएगा,

कभी कोई आए आवर्तन
ताल में हलचल हो जाए ,
राग वही रहेगी चाहे
सुर जितना भी बदले जाए,

गीत भले ना हो प्रख्यात
अच्छे सुरों का हो अकाल,
राग नहीं बदलूंगा मैं
चलती जब तक रहेगी ताल ।
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एक घंटा पहले

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