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जरा फिर से बताना..

                
                                                         
                            ख्वाबों मे तुम्हे सजाया,
                                                                 
                            
सपनो मे पिरोया,
बिन तुझे देखे अपनी दिल की चाहत बनाया,
लेकिन तुमने भी मोहब्बत खूब निभाया,
वो पाक मोहब्वत वो इश्क का खूबसूरत मंजर,
जो मेरे एहसासों मे सदैव जीवंत रहा,
जिसे देखकर खुदा भी हर पल मुस्कुराया,
ये तुम्हारी इनायत थी या मेरी आरजू,
जरा फिर से बताना....!!!
-संजय श्रीवास्तव
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