रिश्ता तोड़ना मत—
दिल यूँ ही बैठ जाएगा,
बिना आवाज़ के टूटकर
खामोश हो जाएगा।
तुमसे जुड़ी हर एक डोर
मेरी साँसों से बंधी है,
इसे यूँ ही मत बिखेरना,
वरना ज़िंदगी अधूरी सी रह जाएगी।
नाराज़गी हो तो कह देना,
दूरी हो तो सह लेंगे,
पर ये रिश्ता मत तोड़ना—
हम शायद फिर संभल न पाएँगे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X