रिश्ते शब्दों से नहीं,
एहसासों से ज़िंदा रहते हैं,
जहाँ सच्चा अपनापन हो
वहीं रिश्ते मुकम्मल होते हैं।
-संजय श्रीवास्तव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X