मत मारो बेजुबान को।
बेजुबान रो देगा।
सीना तर कर लेगा ।
मूक मगर रो देगा ।।
बेजुबान रो देगा।
खंजर तेरा सीना मेरा।
मार कटारी चीरेगा।।
मेरे लहू का कतरा कतरा।
थाली तेरी भर देगा ।।
बेजुबान रो देगा।
मेरी अश्रु धारा बह।
वाष्प बन उड़ जाएगी।।
खंजर घोंप दिया सीने में।
भूख तेरी मिट जाएगी।।
बेजुबान रो देगा।
खड़े हैं साझीदार हजार।
खून से सनी हाथों की धार।।
आग अभी सीने में है।
क्या वो भी पिघल जाएगी।।
बेजुबान रो देगा।
ये तपन मेरे जिगर की है।।
कसाई तेरी भट्टी में।
क्या रूह भी जल जाएगी।।
मत मारो बेजुबान को।
ये दर्द भरी कहानी है।।
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