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“इजाज़त

                
                                                         
                            दिल की हर बात बताऊँ मैं,
                                                                 
                            
क्या दर्द तुम्हें सुनाऊँ मैं।

तुम आँखों से ही समझ लो ना,
जो लफ़्ज़ों से कह न पाऊँ मैं।

ये इश्क़, मोहब्बत, चाहत सब,
कहो तो फिर दोहराऊँ मैं।

रात अभी थोड़ी बाक़ी है,
क्या ख़्वाब तेरे बन जाऊँ मैं।

वक़्त की धूल बहुत भारी है,
तेरी यादों को फिर सजाऊँ मैं।

दे दो इतनी-सी इजाज़त तुम,
तेरे पास कहीं रह जाऊँ मैं।

शायद कल सब बदल जाए,
तुम्हें आज अपना कह जाऊँ मैं।
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2 दिन पहले

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