किरदारों की परिपाटी में
ढल जाती हैं
प्रेम पथिक बन हर पथ पर
यह चल जाती हैं
ऐसी निभाई इनसे मिलती
बन कर शक्कर एकरस
जीवन में घुल जाती हैं
-सत्यनिधि द्विवेदी अंशिल
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