कपड़े कभी
हिफाज़त का सबूत नहीं होते,
असली हिफाज़त तो
निगाहों से होती है।
इंसान के देखने के भाव से होती है
क्या देखता है और
क्यों देखता है?
सब ये निगाहेँ ही तो होती हैं।
जो फर्क समझती हैं
सही और गलत का,
वही इज़्ज़त भी देती हैं,
वही लूट भी लेती हैं।
ये नज़रें ही परदा बनती हैं,
और यही बेपर्दा भी कर देती हैं।
-शाहाना परवीन 'शान'
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