जब उदासी छाई हो सांसो में
जिंदगी एक ढलती शाम बन जाती है
कहती नहीं कुछ किसी को भी पर
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
कुछ कह देते कि 'कुछ नहीं', बात है छोटी सी
पर कहीं छोटी बात बड़ी बन जाती है।
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
-शाहाना परवीन 'शान
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