आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

उदासी की बात

                
                                                         
                            जब उदासी छाई हो सांसो में
                                                                 
                            
जिंदगी एक ढलती शाम बन जाती है
कहती नहीं कुछ किसी को भी पर
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
कुछ कह देते कि 'कुछ नहीं', बात है छोटी सी
पर कहीं छोटी बात बड़ी बन जाती है।
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
-शाहाना परवीन 'शान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर