आजु अवध-नगरिया में, बाजे बधइया हो।
राम-ललन जनमले, छाई खुशहलिया हो॥
दमके दशरथ-भवनवा, जोत जगमगाये हो।
मइया के अँचरा में, सुख-सिंधु समाये हो॥
नाचे-गावे डगरिया, बाजे मृदंगवा हो।
आइल सुर-मुनि टोली, लेके आनंदवा हो॥
फूले अँगना कुसुमवा, महके दुवरिया हो।
आई अइसन शुभ-घरिया, हरषे डगरिया हो॥
ललना मुखड़ा सोहावन, चनवा लजाये हो।
देखि-देखि मन हरषे, अँखिया सिहाये हो॥
संगहिं सखी-सहेली, गावें सोहरिया हो।
गूँजे चारों ओरिया, जय-जयकारिया हो॥
दूध-दही घी बरसे, थार सजाये हो।
झूमे सब नर-नारी, मंगल गाये हो॥
पाइके ललना के दरसन, भाग जगे आज हो।
भक्तन मनवा में बसले, सगरी साज-बाज हो॥
आवा सखी सब मिलके, सोहर गाईं हो।
राम-जनम के बेला, सुख बरसाईं हो॥
गूँजे गगन-अँगनवा, जय-सिय-राम हो।
भइल मंगलमय जगवा, पूरण काम हो॥
- सनातन मुकुंद
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