बधईया राम जनम की आई, बाजे मंगल बाजा हो।
अयोध्या नगरी हँसे-मुस्काये, हरषे सकल समाजा हो॥
दमके दशरथ-भवन उजियारा, दीप-ज्योति जगमगाये हो।
मइया के पावन अँचरा में, सुख-सिंधु उमड़ आये हो॥
बरसें सुमन गगन-मण्डल से, गूँजे जय-जयकारा हो।
ललना के दरसन पाकर, धन्य भइल संसारा हो॥
नाचें-गावें सब नर-नारी, बाजे ढोल-मृदंगवा हो।
आइल सुर-मुनि टोली मिलके, लेके मंगल रंगवा हो॥
मुखड़ा चनवा जइसन चमके, मनवा मोहे लेवे हो।
दुख-दारिद्र सब दूर भगावे, सुख-सम्पति देवे हो॥
आवा मिलि सब गाईं बधईया, राम-जनम के दिनवा हो।
जय-सिय-राम के गूँज उठी, हरषे जग-आँगनवा हो॥
राम-नाम के जो गुन गावे, सो सुख पावे अपार हो।
राम-नवमी के पावन बेला, सबके हो शुभकार हो॥
राम-ललन की कीरति गाकर, अचल रहे सुहागा हो।
मुकुंद-हृदय में बसें राम जी, भाग हमारो जागा हो॥
- सनातन मुकुंद
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