सजा अवध-धाम आज, गूँजे मंगल गान,
प्रकटे प्रभु रामलला, हर्षित सकल जहान।
दशरथ-गृह दीप जलें, शुभ घड़ियाँ मुस्कायें,
कौशल्या-अंचल में, सुख-सिंधु उमड़ आयें।
वेद-ऋचा गूँज उठी, सुर-मुनि जय-जय गाते,
करुणा-मय मूरति बन, प्रभु अवनी पर आते।
बरसें नभ से सुमन, सुर-नर शीश नवाते,
मर्यादा-दीप जलें, जग का तम मिटाते।
मंगल-स्वर चहुँ ओर, शंख-नाद झंकारें,
राम-नाम जाप मधुर, भव-बाधाएँ तारें।
सीता-राम सुयश-अमृत, कोमल धार बहाये,
भक्ति-भाव पूर्ण हृदय, जीवन सफल बनाये।
आओ मिल गान करें, जय श्रीराम पुकारें,
राम-नवमी पावन-पर्व, सुख-शांति संवारें।
- सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X