छोटे छोटे से सपनों को
संग में मेरे बुनने वाले
जीवन में मुस्कानों की
खिलती कलियां चुनने वाले
इतने प्यारे क्यूं हो तुम
देख तुम्हे देखो चेहरा ये
कैसे फूलों सा खिलता है
दूर क्षितिज पर अम्बर जैसे
धरती से जाकर मिलता है
इतना प्रेम दिखाने वाले
मुझको तुम अपनाने वाले
इतने प्यारे क्यूं हो तुम
अरमानों का सृजन करके
उन्हे रूप तुम देने वाले
स्वप्नो के नन्हे पौधो को
जल धूप तुम देने वाले
प्रेम, लक्ष्य और जीवन का
सार सदा बतलाने वाले
बनकर सूत सदा तुम रथ को
युद्ध पार ले जाने वाले
इतने प्यारे क्यूं हो तुम
होकर व्यथित कभी भी जब
मन मेरा कुम्हलाता है
रो रोकर जब अश्रु मेरा
नैन पार आ जाता है
ले करके बाहों में अपनी
मुझको गले लगाने वाले
जख्मों पर तुम प्रेम रूप का
मरहम सदा लगाने वाले
इतने प्यारे क्यूं हो तुम
-शिवांश शुक्ल
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