आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रेम: राधा कृष्ण संवाद

                
                                                         
                            मैं शब्दहीन, मैं सारहीन, मैं स्वयं के प्रश्नों पर मौन हूँ।
                                                                 
                            
हे कृष्णा! अब तुम्हीं बताओ, आखिर मैं कौन हूँ?

ना शब्दहीन, ना सारहीन, तुम मौन की सुंदर भाषा हो।
प्रेम का वृहद रूप तुम राधे, स्वयं एक परिभाषा हो।
.- शिवांश शुक्ल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
59 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर