मगर फिर न आना विचारों में...न आना किसी स्मृति में
फिर न आना मेरी चौखट पर रखे दीपक की ज्योति में.
न करना भ्रमण विचारों में या रोदन मेरे अश्रुओं में.
करो वादा जो जा रहे हो तो पूर्णतः चले जाओगे
बन कोई मिथ्या या अपवाद फिर न लौट आओगे ..
न आओगे फिर किसी पुष्प की सुगंध बन कर
या किसी मधुर गीत की धुन बन कर
जा रहे हो पूर्णतः जाना
फिर न आना वियोग, विलाप या विरह बन कर ......फिर न आना
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