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नई डायरी

                
                                                         
                            नए वर्ष में नई डायरी एक बनाते है,
                                                                 
                            
नई सोच से नई कलम से एक लक्ष्य बनाते है।
नए वर्ष में कुछ पक्के वादे भी करते हैं,
बड़े स्वप्न के साथ उड़ाने भी नई भरते हैं।

नए पेज में खुशियों के पल कुछ लिखते हैं,
मित्रों यारों रिश्तेदारों से खूब मिलते हैं।
कई पेज कई मकसद से खुद ही भर जाते हैं,
खुशियों के पल कुछ दिन यूं नया साल मनाते है।

भूल न जाए फोन के नंबर ,
खो न जाये फोन कहीं पर।
बिछुड़ न जाएं मित्र व प्रियवर,
धन संपत्ति का ब्यौरा घर पर।
सारी चीजें नोट हैं करते,
जिन बातों से लगता है डर।

दिन प्रतिदिन की चर्चा को हम
खास खास बातों को भी हम।
अंतर्मन की प्यार,गुदगुदी,
दुख सुख की घड़ियां भी लिखते।
कभी याद जब आ जाती है,
डायरी में सब दिख जाती हैं।

किसी पेज में दवा ब्यौरा,
किसी में व्यंजन का मनोरंजन।
कही शेर कही कविता लिखता,
शादी ब्याह की जिक्र भी करता।
किसी विशेष घटना के बारे,
कुछ मित्रों ,यारों के बारे,
लिखकर डायरी को है भरते,
मन की कथा व्यथा सब लिखते,
जब दिल कभी विगत दिन सोचे,
खोले डायरी पीछे हो के।
बचपन से अंतिम लम्हे तक,
मस्तिष्क पटल पर सब छवि घूमे।
देख लेखनी दिन प्रतिदिन की
डायरी की मुख को खुद चूमे।
नव वर्ष की लिखी गई ये रचना,
सब मित्रों से मिल जुल करना।
-सूबा लाल "अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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