थोड़ा ज़्यादा, थोड़ा कम, हर पल तुम याद आते हो,
ये बताओ, मेरी लिखी मोहब्बत कभी पढ़ भी पाते हो?
कभी-कभी ये दिल सोचता है,
काश तुम भी मुझे मेरी तरह चाह पाते,
मेरे हर एक एहसास की धड़कन को,
अपने ही दिल में कहीं बसा पाते।
तुम भी तड़पते मेरी एक झलक को,
तुम भी रातों को जागते मेरी तरह,
चाँद से मेरा पता पूछते फिरते,
सितारों में मुझे ढूँढते मेरी तरह।
मैं बेफिक्र होकर सो जाता रात भर,
अगर मेरी फिक्र तुम्हें होती मेरी तरह,
मेरी खामोशी भी तुम सुन लेते ऐसे,
जैसे गूँजती हो मोहब्बत की सदा मेरी तरह
इश्क़ तब जाकर मुकम्मल लगता,
जब दर्द और खुशी दोनों बराबर होते,
मैं तुम्हें याद करता हूँ हर एक सांस में,
काश तुम भी मुझे याद करते मेरी तरह।
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