कहना तो हम बहुत कुछ चाहते हैं ,
शब्दों में इनकी हैवानियत बया नहीं कर पाते हैं ।
पास आते वक्त ये मुस्कुराते हुए आते हैं,
लेकिन खून की गंगा बहाकर ये लौट जाते हैं।
ये दरिंदे आस्तीन के सांप जैसे नजर आते हैं ,
तमाम मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाते हैं ।
किसी के सपनों के संसार को उजाड़ देते हैं ,
किसी की जीवन लीला ही समाप्त कर डालते हैं ।
हर गली में ये अपना मुखौटा बदल लेते हैं ,
कई बार कानून की नजरों से भी बच निकलते हैं ।
कई घरों में कुहराम मचाकर ये सटक जाते हैं,
स्वयं के घरों में ये दीपावली मनाते हैं।
न जाने ऐसे दरिंदों की बलि क्यों नहीं चढ़ाई जाती,
जिनकी करनी हमेशा मानवता को शर्मसार करती ।
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