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आँसू बहाए होंगे

                
                                                         
                            अपने ही फ़ैसले पर अमल आसान न था।
                                                                 
                            
बेरुखी से बेहद उनका दिमाग परेशान था।।

हकीकत में तन्हा हो कर आँसू बहाए होंगे।
बाहर से मुलायम अन्दर में गहरा निशान था।।

मोहब्बत में तनकर कोई कुछ भी कहता रहे।
शर्तिया दोनों तरफ ही बेवजह नुकसान था।।

ख्वाहिशों का अंत ऐसे ही कभी होता नही।
दबाए जाते ज़ज्बात इसका नही निदान था।।

परिस्थितियाँ धीरे-धीरे अपना रंग भी दिखती।
तेष में लिया गया फैसला 'उपदेश' नादान था।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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4 घंटे पहले

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