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गले लगाने को

                
                                                         
                            मन तो करता तुम्हें गले लगाने को।
                                                                 
                            
तुम्हारे ऊपर सारी खुशी लुटाने को।।

क्या मोहब्बत है हमारी किस्मत है।
तुमने साथ दिया जिन्दगी निभाने को।।

अब एक दूजे को समझने के दिन गए।
बचे हैं कुछ बेहतरीन पल बिताने को।।

वक्त अनजाने में किस मोड़ पर लाया।
अब बेचैनिया बची ही नही गंवाने को।।

लोग कहते रहे जो उनके मन आया।
ज़माना कब समझ पाया दीवाने को।।

कुछ भूल करके सुधार रहे 'उपदेश'।
हम को ज़िन्दगी मिली मुस्कराने को।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक दिन पहले

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