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बाल श्रम विरोधी दिवस

                
                                                         
                            होती हैं इन नन्हे मुन्ने हाथों में कमजोर लकीरें।
                                                                 
                            
जीवन खिलता जिनका एक सुंदर उपवन है।।

मत पहनाओ उनके हाथों से मेहनत की जंजीरें।
थोड़ा सा उनके बचपन को भी अब खिलने दो।।

जीवन के सपने कुचल तुमने जो अत्याचार किया।
खिलते सपनों को कुचल बढ़ने का मौका रोक दिया।।

नन्हे हाथों में पुस्तक की पौथी अच्छी लगती हैं।
उनके आंखों की चमक कुछ करने को कहती हैं।।

नन्हे मुन्ने छोटे बच्चे जब कूड़ा बीनते देखे जाते।
तब मन करता क्यों मात-पिता कुछ कर नहीं पाते।।

अठारह वर्ष से पहले कभी बच्चों से काम नहीं।
इस बीच में छोटे बच्चों के सपनों की उड़ान सही।।

उतने बच्चे पैदा करना पालन-पोषण आसान रहे।
न कभी जीवन में मार-काट या कोई घमासान रहे।।

बालश्रम उन्मूलन अभियान बढ़-चढ़कर भाग लो।
छोटे नन्हे बच्चों को न कभी मेहनत का काम दो।।

उनके सपनों के पंख बनों और अच्छा काम करो।
बच्चों के जीवन को नर्क बना न मानवता बदनाम करो।।

उनके सपने सजने लगे ऐसा तुम अब काम करो।
अनपढ़ बच्चों को खोज खाज पढ़ने का इंतजाम करो।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
 
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एक घंटा पहले

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